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क्या सच मे बंध हो जाएगी सारी टेलीकॉम कंपनिया? क्यों 90 हजार करोड़ का फ़ाईन लगा पूरे टेलीकॉम इंडस्ट्रीज को?

भारत में अभी जो सबसे अमीर आदमी है वो आपसे एक मिनट की कॉल का 6 पैसे ले रहा है तो भाई सच मे भारत में मंदी आ चूकि हैं।

Telecom Operator Vs Government of India

यहाँ पे सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला आया हैं की सारी टेलीकॉम कंपनिया को मिलाके भारत सरकार को पूरे 90 हजार करोड़ रुपये देने होंगे।
तो क्या सारी टेलीकॉम कंपनिया बंध हो जाएगी ? या फिर मार्किट में एक ही jio रहेगा ?
सुप्रीम कोर्ट  के इस फैसले के बाद क्या क्या हो सकता है? चलिए उसके बारे में जानते हैं।

भारत में सिर्फ गिने चुने नेटवर्क ही बचे हुए हैं जैसे कि jio, airtel, idea/vodafone और bsnl/mtnl.

Main telecom operators in India

आप जो कॉल करते हो वो पहले फ़्री था पर अब आप को 1 मिनिट के 6 पैसे प्रति मिनिट देने होंगे सिर्फ jio के नेटवर्क में बाकी नेटवर्क पर यह अभी तक फ़्री है पर आगे यह फ़्री नहीं रहेगा।




यह 6 पैसे क्यों ले रहा है jio, तो इस बात पे jio ने बताया है कि यह IUC चार्ज के तहत ले रहा है।

यह TRAI का एक rule है जिसमें एक टेलीकॉम ऑपरेटर जो outgoing कर रहा हैं उसे incoming टेलीकॉम ऑपरेटर को 6 पैसा प्रति मिनिट देने होंगे।

अब से reliance jio में आप को outgoing calls के 108 रुपए प्रति माह ज्यादा देना होंगा पर दूसरी टेलीकॉम कम्पनियों में यह अभी तक फ़्री हैं, पर पता नहीं यह कितने समय की लिए फ़्री होंगे।

सुप्रीम कोर्ट में एक मुकदमा चल रहा था 2007 से जिसका रिजल्ट आया अभी 2019 में जिससे सारे टेलीकॉम ऑपरेटर के होश उड़ गए। यह मुकदमा था AGR (Adjusted Gross Revenue) पे।

AGI/AGR

अब AGR है क्या इस जानने के लिए हमे समय में थोड़ा पीछे जाना पडेगा। जब सारे टेलीकॉम ऑपरेटर की शरुआत हुई थी। तब किसी को टेलीकॉम ऑपरेटर बनना होता था तो वो भारत सरकार के पास जाता और भारत सरकार उसे कुछ करोड़ रूपए में टेलीकॉम ऑपरेटर का license देते और स्पेक्ट्रम देते यहाँ स्पेक्ट्रम यानी कि फ्रीक्वेंसी होती है जो हर टेलीकॉम ऑपरेटर की different होती हैं। पहले भारत सरकार license और स्पेक्ट्रम के सालाना कुछ 25-50 करोड़ रुपए लेती थीं पर 2002 के आसपास इस मॉडल में कूछ बदलाव किए भारत सरकार ने उसमें भारत सरकार ने जारी किया कि जिसमें सारे टेलीकॉम ऑपरेटरो को उनके रेवेन्यू के कुछ प्रतिशत भारत सरकार को देने होंगे। जैसे कि स्पेक्ट्रम पर 8% और license के 4% देने होते थे।

Supremecourt of India

2007 से भारत सरकार और टेलीकॉम ऑपरेटर के बीच सुप्रीम कोर्ट में यह मुकदमा चल रहा था कि रेवेन्यू में क्या आता है जहाँ टेलीकॉम ऑपरेटर के अनुसार रेवेन्यू का मतलब उनके सर्विस पर मिल रहा प्रोफिट है तो भारत सरकार के अनुसार रेवेन्यू का मतलब हैं कि आप का सबकुछ रेवेन्यू माना जायेगा यानी आपकी प्रोपर्टी है औऱ उसमें से कोई प्रोफिट आ रहा है तो वो भी रेवेन्यू माना जाएगा, बैंक में FD पर आने वाला प्रोफिट भी रेवेन्यू माना जाएगा, और अभी 2019 में  इसका फैसला भारत सरकार के हक में आया।

अब तक जो टेलीकॉम कम्पनिया जो पैसा भारत सरकारको दे रहीं थीं वो तो सिर्फ उनके यूजर्स के पास से आने वाले प्रोफिट था। टेलीकॉम कम्पनिया उनकी शरुआत होने से अब तक दूसरे प्रॉफिटेबल सोर्स से आने वाले प्रोफिट में से भारत सरकार को कुछ नहीं दिया था तो तब से अब तक के समय के लिए अलग अलग टेलीकॉम ऑपरेटर पर अलग अलग फ़ाईन आ गया जो उन्होंनेे अब तक भरा ही नहीं यहां जो टोटल ammount निकल के आया है वो हैं पूरे 90 हज़ार करोड़ रुपए जो सारे टेलीकॉम ऑपरेटरों को भारत सरकार को देने है।

यहाँ बात करे airtel की तो उस पर बक़ाया निकल के आये है पूरे 21 हजार करोड़ रुपए, vodafone/idea की बात करे तो टोटल amount है पूरे 27 हजार करोड़
Reliance CDM और GSM जो अब बंध हो गया उन्हें भी करीब 19 हजार करोड़ रुपए चुकाने होंगे इन सभी में सबसे कम रक़म का भुगतान Reliance jio को करना है जो है सिर्फ 13 करोड़ रुपए क्योंकि jio मार्केट में पिछले 2 सालों से ही आया है।

अब वैसे भी jio के आने से दूसरे टेलीकॉम कम्पनिया lose में जा रहीं थी ऊपर से सुप्रीम कोर्ट के रिजल्ट से वे सभी कम्पनियो को कहीं दिवाला न निकल जाए। vodafone ने तो यहाँ तक कह दिया है कि वो भारत को छोड़ के जा रहा है।
इस बात को लेकर टेलीकॉम इंडस्ट्रीज में हाहाकार मचा हुआ है क्योंकि इतना सारा फाइन चुकाना है ऊपर से इन्कम jio के वजह से आ  नहीं रही और आगे 5g आ रहा है उसकि भी स्पेक्ट्रम और लाइसेंस खरीदना पड़ेगा उसकी मेन्टेन्स का खर्चा भी उन्हे सरकार को देना पड़ेगा। तो इस पर expert's का कहना है कि भारत मे या तो एक या दो ही टेलीकॉम ऑपरेटर रहेंगे बाकी सारे चले जाएंगे।

Jio & airtel

तो देखना यह हैं  कि अब भारत में कौनसा नेटवर्क अपना अस्तित्व बनाए रखता हैं। आगे जो सिर्फ jio ही एकमात्र विकल्प रह जाता हैं तो आगे jio के प्लान्स महँगे हो सकते हैं है उस पर कोई दौराय नहीँ है।


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