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क्या है नागरिकता संसोधन बिल? कल राज्यसभा में नागरिकता बिल पास हुआ। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को ऐतिहासिक बताया।

क्या है नागरिकता संसोधन बिल?
नागरिकता संसोधन बिल

  सरकार ने जो वर्तमान नागरिकता कानून सुधार बिल पेश किया है, उसमें कहा गया है कि भारतीय, सिख, पारसी, ईसाई, बौद्ध आदि, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत के शरणार्थी हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता अब दी जाएगी, लेकिन उसमे उन्होंने  मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है।

  जो लोग 31 दिसंबर 2014, की तय की गई तारीख़ से पहले भारत में आश्रित हुए हैं। वे लोग वर्तमान प्रावधान के अनुसार भारतीय नागरिकता के लिए सरकार से अपील कर सकते हैं। पहले भारतीय नागरिकता के लिए 11 साल तक यहां रहना आवश्यक होता था। लेकिन वर्तमान प्रावधान के अनुसार, शरणार्थियों के लिए ये समय अब सिर्फ 6 साल कर दिया गया हैं। अगर इस तरह के किसी भी शरणार्थी पर देश में कोई मुकदमा चल रहा है, तो वह ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता प्राप्त करने से नहीं रोकेगा।

  यदि ओ.सी.आई. कार्डधारक अपनी शर्तों का उल्लंघन करता है, तो केंद्र को कार्ड रद्द करने का अधिकार होगा। लेक़िन इस बात पर उन लोगों की भी सुनी जाएगी।

राज्यसभा से बिल के समर्थन के बाद, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को ऐतिहासिक बताया।

  PM मोदी ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह हमारे देश की करुणा और भाईचारे के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन है। मुझे खुशी है कि बिल राज्यसभा में पास हुआ। मैं सांसदों का आभारी हूं जिन्होंने बिल के पक्ष में मतदान किया। यह बिल उन लोगों की पीड़ा को दूर करेगा जो कई सालों से पीड़ित हैं।

अमित शाह ने भी ट्वीट कर खुशी जाहिर की।

   अमित शाह ने कहा कि जैसे-जैसे नागरिकता बिल पास होता गया, लाखों पीड़ितों और वंचितों के सपने सच होते गए। अमित शाह ने आगे कहा कि मैं पीएम मोदी का आभारी हूं जिन्होंने प्रभावित लोगों के आत्मसम्मान की रक्षा की।

अल्पसंख्यक, विशेष रूप से मुस्लिम भाइयों और बहनों को डरने की जरूरत नहीं है - अमित शाह 

  गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता बिल पर बहस के दौरान एक बार फिर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। अमित शाह ने कहा कि यदि भारत विभाजित नहीं हुआ होता, तो इस बिल को संसद में लाने की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि अगर हम चाहते तो हम अन्य सरकारों की तरह पांच साल काम कर सकते थे। लेकिन मोदी सरकार देश में हालात सुधारने के लिए आई है। यह स्थिति इसलिए बनी है कि पिछली सरकारों ने कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस बिल से भारत के कई धर्मों के लोगों को नागरिकता मिलेगी।

  लेकिन कांग्रेस सहित विपक्ष का ध्यान इस बात पर है कि मुसलमानों को शामिल क्यों नहीं किया गया है। विपक्ष का धर्मनिरपेक्षता केवल मुसलमानों पर आधारित है। लेकिन हमारी सरकार की धर्मनिरपेक्षता किसी एक धर्म पर आधारित नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश के किसी भी अल्पसंख्यक, विशेष रूप से मुस्लिम भाइयों और बहनों को इस बिल से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।




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