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जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोरोना-वायरस: चीन में कोरोना-वायरस के सक्रमण के कारण भारत के N95 मास्क की माँग में बढ़ोतरी, दोगुना उत्पादन शरू।

 चीन में हाहाकार मचाने के बाद अब कोरोना-वायरस लगभग 21 अलग अलग देशों में फैल चुका है। चीन ने कोरोना-वायरस से अपने लोगों को बचाने के लिए एक वैक्सीन का आविष्कार किया है। दूसरी ओर, डॉक्टरों ने कोरोना-वायरस से बचने के लिए घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क पहनने की सलाह दी है। जिसके कारण N95 मास्क की मांग बढ़ गई है। भारत पर भी इसका असर देखा जा रहा है।, जानें इस मास्क का भारत के बाजारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। • चीन के कोरोना-वायरस से भारतीय N95 मास्क निर्माता कंपनियों का फायदा। • N95 मास्क की मांग से भारतीय कंपनियों ने उसका उत्पादन दोगुना किया। • N95 मास्क निर्माता कंपनियों के कामकाजी समय मे हुई बढोति।  N95 मास्क ही क्यों?  N95 मास्क एक सुरक्षात्मक उपकरण है जो यदि सही तरीके से उपयोग किया जाता है, तो किसी भी एरोसोल, छोटी से छोटी बूंद, औऱ वायु-जनित संक्रमण को श्वसन से रोकने के लिए उपयोग किया जा सकता है।  N95 मास्क बहुत छोटे, 0.3 माइक्रोन कणों का 95% तक ब्लॉक करता है।  N95: N का अर्थ है NIOSH और 95 के लिए न्यूनतम 95% निस्पंदन दक्षता (0.3-माइक्रोन के छोटे कण जैसे कि एरोसोल और बड़ी बूंदों के लिए) है।

क्वालकॉम ने इसरो के NavIC GPS के साथ एंड्रॉइड स्मार्टफोन के लिए अपने पहले चिपसेट को लॉन्च किया।

 क्वालकॉम ने भारत में तीन नए चिपसेट लॉन्च किए। यह चिपसेट स्नैपड्रैगन 720G, स्नैपड्रैगन 662, स्नैपड्रैगन 460 है। चिपसेट निर्माता क्वालकॉम ने दावा किया है कि यह चिपसेट भारत में 4 जी कनेक्टिविटी को और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक को औऱ भी बेहतर बनाएगा। यह चिपसेट इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर गेमिंग और कैमरा प्रदर्शन को बेहतर बनाएगा।  हालाँकि, यह चिपसेट 5G कनेक्टिविटी का समर्थन नहीं कर सकता है। चिपसेट 'नाविक' (NavIC) को समर्थन करेगा।  क्वालकॉम का चिपसेट इसरो के 'नाविक' ( नेविगेशन विथ इंडियन कंसल्टेशन) का समर्थन करेगा।  नाविक अमेरिका के 'GPS' की तरह, भारत का अपना नेविगेशन सिस्टम है, जो कि इसरो द्वारा विकसित किया गया है। सभी तीन चिपसेट हैंडसेट NavIC का उपयोग करके नेविगेशन का समर्थन करेंगे।  व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले GPS के विपरीत, जिसमें 24 उपग्रह शामिल हैं, NavIC में सात उपग्रह ही हैं और उनकी सीमा भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में, देश की सीमा से 1,500 किमी तक फैली हुई है।  GPS के 24 उपग्रह पूरे ग्रह को अपनी कार्यप्रणाली में शामिल करते हैं, जबकि NavIC के सात उ

ऑस्ट्रेलिया में आग कैसे लगी? आग बुझने के बाद कि समस्याए और आप कैसे ऑस्ट्रेलिया की मदद कर सकते हो।

 ऑस्ट्रेलिया के जंगल की आग अब बुझने लगी है क्योंकि पिछले कई दिनों से वहाँ कई जगहों पर बारिश हुई है। लेकिन पिछले साल दिसंबर में, ऑस्ट्रेलिया में भयानक आग लगी औऱ वो छह महीने तक फैलती रही। इस आग से लगभग 28 लोग और 1 करोड़ जीव जंतु मारे गए, आग में 3000 से अधिक घर नष्ट हो गए औऱ 179 लाख एकड़ जमीन जल गई।  इस आग को रोकने का प्रयास किया जा सकता था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इसके लिए पहले से तैयारी नहीं कि थी। जब की उन्हें इस बात का पता 12 साल पहले ही चल गया था, की ऑस्ट्रेलियाई जंगल में ऐसी भयानक आग लग सकती हैं और इससे बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता हैं।  ऑस्ट्रेलियाई सरकार को 2008 में एक रिपोर्ट मिली थी, जिसमें कहा गया था की, "यदि जलवायु परिवर्तन इसी तरह जारी रहता है और ग्लोबल वार्मिंग भी जारी रहती है, तो इसके कारण 2020 के पहले या उसकी शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में विनाशकारी आग लग सकती  है। और ऑस्ट्रेलिया का तापमान काफी अधिक बढ़ सकता है।"  पिछले 6 महीनों से वहाँ जंगलो में लगी आग के कारण ऑस्ट्रेलिया का औसत तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक हो गया था।  16 जनवरी, 2020 के दिन संयुक्त

भारत की पहली साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट “AASHVAST” गुजरात में हुईं लॉन्च।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में भारत की पहली साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट “ AASHVAST ” को लॉन्च किया।  AASHVAST के साथ, उन्होंने 2 अन्य परियोजनाएं VISWAS और Netrang को भी शुरू किया। AASHVAST परियोजना साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए एक हेल्पलाइन के रूप में कार्य करेगी। यह परियोजना गुजरात पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी जो गुजरात के आम लोगों को साइबर सुरक्षा और समाधान प्रदान करेगी। प्रोजेक्ट AASHVAST से गुजरात राज्य में साइबर क्राइम को तत्कालीन रूप में रोका जाएगा। AASHVAST के साथ, वीडियो इंटीग्रेशन एंड स्टेट वाइड एडवांस सिक्योरिटी प्रोजेक्ट, जिसे VISWAS भी कहा जाता है, उसे लॉन्च किया गया है।   VISWAS के तहत पुलिस को काफ़ी मदद मिलेगी जैसे कि; लॉ एंड ऑर्डर मैनेजमेंट, प्रोएक्टिव ट्रैफिक मैनेजमेंट और कंट्रोल, वीडियो एनालिटिक्स की मदद से क्राइम डिटेक्शन और घटना की जांच और वीडियो फोरेंसिक। इसके साथ प्रोजेक्ट 'Netrang' के तहत राज्य के 33 जिलों में कमांड और कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। भारत में NCRB (नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो) के अनुसार स

मौन में बड़ी ताकत है।

मौन में बड़ी ताकत है। रमेश 77 साल की उम्र का बुजुर्ग व्यक्ति था।  वह बहुत खुशी से रहते थे और उन्होंने एक सुंदर परिवार बनाया था। जब उनके बच्चे बड़े हो गए तब वह सभी अच्छे करियर और भविष्य की तलाश में विभिन्न शहरों में चले गए। उसके बाद रमेश अपनी मृत पत्नी की यादों के साथ अकेले उनके गाँव में रहते थे। रमेश के 4 पोता-पोती थे और वे अपनी छुट्टियों के दौरान उनसे मिलने आते थे। गर्मियों की छुट्टी का समय था और रमेश अपने पोता-पोती के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। वह बच्चों के लिए अपने घर की साफ़ सफाई कर रहा थे, बगीचे की खुदाई कर रहा थे, घरेलू सामानों को फिर से व्यवस्थित कर रहा थे, बच्चों के पसंदीदा खाद्य पदार्थ, बच्चों के लिए कपड़े आदि खरीद रहे थे। इन सभी व्यस्त व्यवस्थाओं में उन्होंने अपनी पसंदीदा पुरानी घड़ी खो दी।  यह घड़ी उनकी मृत पत्नी ने उपहार में दी थी जब उनका पहला बच्चा पैदा हुआ था। रमेश ने उस घड़ी को क़ीमती बनाया और यह उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद उनका एकमात्र साथी बन गया।  वह घड़ी को भूल गये और घर में बच्चों को पाकर खुश थे।  अगले दिन ही जब वह स्नान करने वाले थे, तब उन