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भारत की पहली साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट “AASHVAST” गुजरात में हुईं लॉन्च।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में भारत की पहली साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट “AASHVAST” को लॉन्च किया।  AASHVAST के साथ, उन्होंने 2 अन्य परियोजनाएं VISWAS और Netrang को भी शुरू किया।


AASHVAST परियोजना साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए एक हेल्पलाइन के रूप में कार्य करेगी। यह परियोजना गुजरात पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी जो गुजरात के आम लोगों को साइबर सुरक्षा और समाधान प्रदान करेगी। प्रोजेक्ट AASHVAST से गुजरात राज्य में साइबर क्राइम को तत्कालीन रूप में रोका जाएगा।

AASHVAST के साथ, वीडियो इंटीग्रेशन एंड स्टेट वाइड एडवांस सिक्योरिटी प्रोजेक्ट, जिसे VISWAS भी कहा जाता है, उसे लॉन्च किया गया है।

 VISWAS के तहत पुलिस को काफ़ी मदद मिलेगी जैसे कि; लॉ एंड ऑर्डर मैनेजमेंट, प्रोएक्टिव ट्रैफिक मैनेजमेंट और कंट्रोल, वीडियो एनालिटिक्स की मदद से क्राइम डिटेक्शन और घटना की जांच और वीडियो फोरेंसिक। इसके साथ प्रोजेक्ट 'Netrang' के तहत राज्य के 33 जिलों में कमांड और कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।


भारत में NCRB (नेशनल क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो)
के अनुसार साइबर क्राइम साल 2016 और 2017 के बीच में लगभग दोगुना हो गए हैं। इसलिए, भारत सरकार उन्हें नियंत्रण में लाने के लिए कई उपाय कर रही है।

सरकार ने हाल ही में I4C (इंडियन साइबर क्राईम कोर्डिनेशन सेंटर) शुरू किया हैं, जिसके तहत साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी डिवीजन (C & IS) की स्थापना की है।

C & IS, NATGRID (नेशनल इंटिलिजेंस ग्रिड) के तहत लागू किया जाएगा।


NATGRID एक खुफिया ग्रिड है जो भारत सरकार के तहत काम करने वाली सुरक्षा एजेंसियों के डेटाबेस को जोड़ता है।जिसके साथे NISPG (नेशनल इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी पॉलीसी) का उद्देश्य साइबर स्पेस में इन्फॉर्मेशन का संरक्षण करना है।

जाने AASHVAST को विस्तार से।


आज के टेक्नोलॉजी युग में ऑनलाइन हो रहे फ़्रॉड को साइबर क्राइम कहा जाता है। मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और इंटरनेट के माध्यम से धोखाधड़ी और अन्य साइबर क्राइम से बचाने के लिए गुजरात पुलिस अब सुसज्जित हो गई है।  गुजरात राज्य के प्रत्येक नागरिक को "साइबर क्राइम सुरक्षा" प्रदान करने के लिए, गुजरात पुलिस देश की पहली साइबर सुरक्षा से सज्जित एडवांस कंट्रोलरूम के माध्यम से आपकी सहायता करेगी।

AASHVAST  के भिन्न अंग

साइबर क्राइम इंसिडेंट रिस्पॉन्स युनिट (IRU)

"धोखाधड़ी", लॉटरी फ्रॉड, कस्टमर-केयर फ्रॉड, के-वाई-सी फ्रॉड, ई-कॉमर्स फ्रॉड, डेबिट-क्रेडिट कार्ड से संबंधित साइबर फ्रॉड और किसी अन्य प्रकार के साइबर फ्रॉड के बारे गुजरात राज्य के सभी नागरिक "100" नंबर डायल करके औऱ सात नए बनाए गए जिलों के नागरिक "112" नंबर डायल करके बिना किसी हिचकिचाहट के शिकायत कर सकते हैं। गुजरात पुलिस के साइबर क्राइम यूनिट की तकनीकी टीम द्वारा शिकायत का तुरंत समाधान किया जाएगा। इसके अलावा, साइबर अपराध के पंजीकरण पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।


साइबर क्राइम प्रिवेंशन युनिट (CCPU)

आज के डिजिटल युग में हो रहे अप्रत्यक्ष साइबर क्राइम से निपटने के लिए, देश के पहले गुजरात साइबर क्राइम विभाग ने सटीक जानकारी और मार्गदर्शन के साथ राज्य के सभी नागरिकों को साइबर सुरक्षा कवर प्रदान किया है वो भी अत्याधुनिक "साइबर क्राईम प्रिवेंशन यूनिट" बना कर। इस यूनिट में, गुजरात पुलिस साइबर क्राइम में शामिल आरोपियों के मोबाइल नंबरों का विश्लेषण करेगी और गुजरात के नागरिकों को SMS भेजेगी जो उनके संपर्क में हैं ताकि उन्हें अपराध का शिकार होने से रोका जा सके। इसके अलावा, यदि किसी वेब साइट को फ़िशिंग लिंक और फर्जी वेबसाइट के माध्यम से नागरिकों को गुमराह करते हुए पाया जाता है, तो साइबर क्राइम प्रिवेंशन यूनिट की तकनीकी टीम द्वारा जानकारी एकत्र की जाएगी और अगर वेबसाइट को इ-लीगल पाई जाती है, तो उसे बंध कर दिया जाएगा।


एंटी साइबर बुलिंग यूनिट (ABU)

 मोबाइल फोन अब असामाजिक तत्वों के हाथों में एक नया हथियार है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर या इंटरनेट के माध्यम से किसी को डराने, धमकाने, अपमानित करने, उपहास करने या क्रोध को प्रेरित करने के लिए भेजे गए किसी भी संदेश को साइबरबुलिंग कहा जाता है। आमतौर पर, नौ युवा इस तरह की साइबर क्राईम से पीड़ित होते हैं, लेकिन अब आपको इस तरह के उत्पीड़न का शिकार नहीं होना पड़ेगा।  अपनी शिकायत आप गुजरात पुलिस की हेल्पलाइन नंबर 100 और नंबर 112 (सात नए बनाए गए जिलों के लिए) पर साझा करें। इसके बारे में गुजरात पुलिस आपको उचित मार्गदर्शन देंगी। इसके अलावा, आपकी पहचान गोपनीय रखकर साइबर अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


साइबर सुरक्षा लैब (CSL)

 कई मामलों में, यह पाया जाता है कि एक वायरस या पैच आपके मोबाइल या कंप्यूटर में छिपा हुआ होता है, वो आपकी जानकारी (डिजिटल डेटा) एकत्र कर रहा होता है, और सारे डेटा रिमोट एक्सस द्वार अन्य किसीको भेज रहा होता है। इस बात को लेकर गुजरात पुलिस साइबर क्राइम ने ऐसे वायरस को दूर करने के लिए एक "साइबर सिक्योरिटी लैब" शुरू की है। अब अपने मोबाइल फोन, टैबलेट, कंप्यूटर, लैपटॉप, मेमोरी कार्ड या हार्ड डिस्क को आप गुजरात पुलिस की साइबर सुरक्षा लैब में लाएं और किसी भी संदिग्ध वायरस, मैलवेयर या विवादास्पद एप्लिकेशन (MALICIOUS APPLICATION) औऱ अपने उपकरणों को मुफ्त में स्कैन करें। Vulnerable पैच का तुरंत पता लगाने से आपके उपकरणों को मुफ्त में साइबर सुरक्षा मिलेगी।


और अधिक जानकारी के लिए गुजरात साइबर पुलिस की ऑफिशियल वेबसाइट https://gujaratcybercrime.org/ पर जाइए।

गुजरात पुलिस की AASHVAST पर बनी हिंदी वीडियो देखने के लिए: Click here

टिप्पणियाँ

  1. Sir mere sath frod hua hai muje job dene k vaste mujse ૮૦૦૦ rs le liya

    Sir pls help me

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आप जल्द से जल्द नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाये और जो फ़्रॉड ऑनलाइन हुआ है तो ऊपर दी गई जानकारी अनुसार साइबर सेल में कॉल करें

      हटाएं

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